उत्तरकाशी: जनपद में लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. इस समय गेहूं की फसल पूरी तरह पक्कर तैयार खड़ी है. लेकिन खरबा मौसम के चलते किसान फसल की कटाई नहीं कर पा रहे हैं. लगातार बारिश से खेतों में खड़ी गेहूं की बालियां झड़ने लगी है. जिससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका सताने लगी है.
किसानों का कहना है कि इस वर्ष मौसम ने शुरू से ही उनका साथ नहीं दिया. किसान कैलाश उनियाल, रमेश असवाल, श्यालिक राम नौटियाल, हरदेब भंडारी, हकूमत सिंह, नवीन गैरोला और ओमप्रकाश गैरोला समेत अन्य किसानों ने बताया कि शीतकाल में सामान्य से बहुत कम बारिश होने के कारण मटर की फसल पहले ही खराब हो गई थी. इसके बाद सेब, आड़ू और पुलम जैसे बागवानी फसलों में फ्लोरिंग के समय हुई बारिश और ओलावृष्टि से भी भारी नुकसान हुआ. किसानों ने बताया कि अब गेहूं की फसल तैयार होने के बावजूद लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि के कारण कटाई कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गया है.
खेतों में अधिक नमी और तेज हवाओं के कारण गेहूं की फसल गिरने लगी है तथा दाने झड़ रहे हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की संभावना है. किसानों ने शासन-प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराकर नुकसान का आकलन करने तथा किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है. वहीं, नौगांव ब्लॉक के धारी कफनौल क्षेत्र सहित स्योरी फल पट्टी में भी भारी ओलावृष्टि से सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है. ओलों की मार से सेब की फसल की सुरक्षा के लिए लगाई गई ओला अवरोधक जालियां तक टूट गई, जिसकी चपेट में आई टहनियों के टूटने से सेब के दाने झड़ गए. ओलों से खेतों में पक कर कटने के लिए तैयार गेंहू की फसल भी खराब हो गई. सेब, आड़ू, पुलम, खुमानी की फसल को हुए नुकसान से काश्तकार चिंतित हैं. काश्तकारों का कहना है कि लगातार हो रही ओलावृष्टि ने उनकी चिंता बढ़ा दी है.