रुद्रप्रयाग: विश्व के सबसे ऊंचे शिव मंदिर और भगवान शिव के पंचकेदारों में तृतीय केदार तुंगनाथ धाम में इस वर्ष आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा है. यात्रा सत्र के दौरान अब तक 1 लाख 24 हजार 676 श्रद्धालु बाबा तुंगनाथ के दर्शन, पूजा-अर्चना एवं जलाभिषेक कर चुके हैं. यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में सर्वाधिक माना जा रहा है. तुंगनाथ धाम की बढ़ती लोकप्रियता के साथ-साथ उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन के नए आयाम स्थापित कर रहा है.
समुद्र तल से लगभग 12,073 फीट की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ धाम अपने प्राकृतिक सौंदर्य, हिमालयी वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा के कारण देश-विदेश के श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों का प्रमुख आकर्षण बना हुआ है. इस वर्ष यात्रा के दौरान सप्ताहांत, अवकाश और विशेष रूप से श्रावण मास में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बाबा तुंगनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे. यात्रा मार्ग पर लगातार श्रद्धालुओं की चहल-पहल ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया.
यात्रा का सकारात्मक प्रभाव स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. चोपता, बणियाकुंड, दुगलबिट्टा, मक्कूमठ और आसपास के क्षेत्रों में होटल, होमस्टे, भोजनालय, स्थानीय दुकानदार, घोड़ा-खच्चर संचालक और पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसायियों को इस वर्ष लाभ मिला है. बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के कारण स्थानीय युवाओं के लिए भी स्वरोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं. जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है.
मंदिर समिति, तीर्थ पुरोहित समाज और स्थानीय प्रशासन के समन्वित प्रयासों से पूरी यात्रा व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित की जा रही है. श्रद्धालुओं की सुरक्षा, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाएं, मार्ग प्रबंधन और अन्य आवश्यक सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. जिससे यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ रहा है.
तुंगनाथ धाम के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित ने बताया अब तक 64,393 पुरुष, 53,290 महिलाएं, 6,765 बच्चे, 159 साधु-संत तथा 69 विदेशी पर्यटक सहित कुल 1,24,676 श्रद्धालु बाबा तुंगनाथ के दर्शन एवं जलाभिषेक कर विश्व शांति, सुख-समृद्धि और मानव कल्याण की कामना कर चुके हैं.
वहीं मंदिर समिति के चंद्रमोहन बजवाल ने स्पष्ट किया कि चोपता से सीधे चंद्रशिला जाने वाले पर्यटकों को मंदिर समिति के इस रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया है. यदि उन्हें भी जोड़ा जाए तो तुंगनाथ क्षेत्र में पहुंचने वाले लोगों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होगी.