सुंदर वादियां के बीच झील में बोटिंग का लुफ्त उठाने के रोजाना हजारों की संख्या में पर्यटक लोहाघाट की कोली ढेक झील पहुंच रहे हैं. उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों के पर्यटक झील की खूबसूरती को देखने पहुंच रहे हैं. साथ ही लोहाघाट की ठंडी वादियों में इस कृत्रिम झील का आनंद उठा रहे हैं.
साल 2006 में तत्कालीन सरकार द्वारा इस कोली ढेक कृत्रिम झील निर्माण को स्वीकृति दी गई थी. वहीं सिंचाई विभाग द्वारा 2009 में इस झील के निर्माण की डीपीआर बना कर शासन को भेजी गई. 2018 में इस झील का निर्माण लगभग 30 करोड़ की लागत से शुरू हुआ जो कि 2022 में बन कर तैयार हुई. लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी, 80 मीटर चौड़ी और लगभग 21 मीटर गहरी इस कृत्रिम झील का निर्माण साल 2022 में लोहावती नदी में लगभग 30 करोड़ की लागत से हुआ है.
सीएम पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से लोहावती नदी में बने कोली ढेक झील पर सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है. 16 करोड़ रुपए की लागत से झील एरिया का सौंदर्यकरण, रेस्टोरेंट निर्माण, पारंपरिक शैली में पटाल सड़क, शाम के समय लाइट शो समेत विभिन्न कार्यों को प्रथम चरण में शुरू किया गया है. जिससे निश्चित ही जिले के इस उभरते पर्यटक स्थल पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी. पर्यटक इस प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज झील में बोटिंग के अलावा गोल्डन महाशीर समेत विभिन्न प्रजातियों की मछलियों के भी दीदार कर सकते हैं. सरकार के निर्देशन में इस क्षेत्र के विकास को लेकर लगातार प्रशासन द्वारा कार्य किए जा रहे हैं.
-मनीष कुमार, जिलाधिकारी चंपावत-
कैसे पहुंचें: दिल्ली से लोहाघाट कोली ढेक झील तक पहुंचने के लिए बस या ट्रेन से टनकपुर पहुंचा जा सकता है. टनकपुर से बस के जरिए लोहाघाट की यात्रा भी कर सकते हैं. लोहाघाट बस स्टेशन से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर यह रमणीय स्थल है. वहीं हवाई यात्रा से दिल्ली से पंतनगर हवाई अड्डे तक पहुंचकर लोहाघाट पहुंचा जा सकता है. इसके अलावा हल्द्वानी से चंपावत तक हेली सेवाओं के माध्यम से भी पहुंचा जा सकता है.