उत्तराखंड में महंगा हुआ रोड कंस्ट्रक्शन, कई परियोजनाएं ठप, जानिये वजह

देहरादून: पश्चिम एशिया ने चल रहे विवाद की वजह से ईंधन की सप्लाई प्रभावित हो रही है. जिसके चलते वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल के दाम में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है. वर्तमान स्थिति ये है कि क्रूड ऑयल के दाम 107 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया है. यही नहीं, पिछले कई महीने से पश्चिम एशिया में चल रहे विवाद की वजह से तारकोल (बिटुमेन) के दामों में भी काफी अधिक बढ़ोत्तरी हुई है. जिसके चलते उत्तराखंड राज्य में सड़क निर्माण का कार्य न सिर्फ महंगा हो गया है बल्कि कई निर्माण कार्य भी ठप हो गए. बिटुमेन का दाम बढ़ने की वजह से तमाम ठेकेदारों ने रेट बढ़ाने की मांग की है.

दरअसल, वैश्विक स्तर पर बढ़े क्रूड ऑयल संकट का असर अब उत्तराखंड में सड़क निर्माण कार्यों पर भी दिखाई देने लगा है. सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाला तारकोल (बिटुमेन) के दाम में पिछले कुछ महीने में करीब 60 फीसदी तक बढ़ोत्तरी हो गई है. जिसके चलते कई सड़क निर्माण कार्य ठप पड़ गए हैं.

दरअसल, तारकोल की कीमतों में भारी बढ़ोत्तरी होने के बाद ठेकेदारों ने पुराने रेट पर काम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं. जिसके चलते अब लोक निर्माण विभाग ने बढ़ी लागत को देखते हुए रेट रिवाइज करने का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेज दिया है. ऐसे में अब लोक निर्माण विभाग को वित्त विभाग की मंजूरी का इंतजार है, ताकि रेट रिवाइज होने के बाद सड़क निर्माण के तमाम परियोजनाओं का कार्य सुचारु हो सके.

मानसून से पहले इस मामले पर समाधान होना अनिवार्य है. अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो मानसून से पहले सड़क निर्माण और मानसून से पहले सड़कों को गड्ढा मुक्त के अभियान पर बट्टा लग सकता है. लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडेय ने कहा वर्तमान समय में बहुत ज्यादा समस्या नहीं आ रही है, क्योंकि बिटुमेन की अभी उपलब्धता है. मार्च महीने से बिटुमेन का दाम बढ़ गया है. जिसके चलते बिटुमेन की उपलब्धता में समस्या आ रही है. मार्च से पहले बिटुमेन का जो रेट था उसमें अप्रैल मई महीने में काफी अधिक बढ़ोत्तरी हुई है.

बिटुमेन का दाम बढ़ने की वजह से भारत सरकार ने भी नेशनल हाईवे से संबंधित कार्यों के लिए आए बिटुमेन के रेट को अनुमति दी है. इसके साथ ही कुछ राज्यों ने भी नए रेट को मंजूरी दे दी है. जिसको देखते हुए उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग ने भी एक प्रस्ताव, वित्त विभाग को भेजा है. जिससे वित्त विभाग की सहमति लेते हुए इसको आगे बढ़ाया जा सके. जिन ठेकेदारों के टेंडर मार्च महीने से पहले हुए हैं उनके लिए वित्त विभाग से अनुमति मांगी गई है. ताकि वर्तमान समय में बिटुमेन का जो मार्केट रेट है उस रेट को अनुमति दी जाए.

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