इनकम टैक्स के टारगेट पर उत्तराखंड के कई कॉपरेटिव बैंक, बड़े एक्शन की तैयारी, जानिये वजह

देहरादून: उत्तराखंड के चार शहरों में मौजूद कॉपरेटिव बैंकों पर इनकम टैक्स विभाग भारी भरकम पेनल्टी लगाने की तैयारी कर रहा है. इन बैंकों ने आईटी डिपार्टमेंट से सैकड़ों करोड़ रुपए के ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड छुपाए हैं. जिसकी जांच के बाद ये पूरी गड़बड़ी सामने आई है.

वित्तीय लेन-देन की गलत रिपोर्टिंग का आरोप: उत्तराखंड में सहकारी बैंकों की कार्यप्रणाली पर अब आयकर विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है. प्रदेश के चार शहरों में संचालित कॉपरेटिव बैंकों पर भारी भरकम पेनल्टी लगाने की तैयारी चल रही है. मामला करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन की जानकारी छुपाने और गलत रिपोर्टिंग से जुड़ा है. जिसने बैंकिंग सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

तीन शहरों में इनकम टैक्स का जांच अभियान: दरअसल आयकर विभाग को लंबे समय से इन बैंकों की रिपोर्टिंग को लेकर संदेह था. इसी के चलते विभाग ने उत्तरकाशी, कोटद्वार और काशीपुर में स्थित सहकारी बैंकों में सर्वे और जांच अभियान चलाया. जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने विभाग के अधिकारियों को भी चौंका दिया. जांच में पाया गया कि इन बैंकों ने सैकड़ों करोड़ रुपये के ऐसे ट्रांजैक्शन की जानकारी आयकर विभाग को नहीं दी, जिनकी रिपोर्टिंग नियमानुसार अनिवार्य होती है.

1200 करोड़ की जानकारी छुपाई गई: जांच में खुलासा हुआ कि उत्तरकाशी, कोटद्वार और काशीपुर के बैंकों द्वारा करीब 800 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन पूरी तरह से छुपाए गए. इसके अलावा लगभग 400 करोड़ रुपये के लेन-देन की जानकारी गलत तरीके से प्रस्तुत की गई. जिसके चलते आयकर विभाग तक सही आंकड़े नहीं पहुंच पाए. इस तरह कुल मिलाकर करीब 1200 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन की जानकारी या तो छुपाई गई या फिर गलत दी गई.

नियमों की अनदेखी आई सामने: बैंकों के लिए यह अनिवार्य होता है कि वे एक निश्चित सीमा से अधिक के वित्तीय लेन-देन की जानकारी आयकर विभाग को समय पर और सही तरीके से दें. इससे टैक्स चोरी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके. इस मामले में नियमों की अनदेखी साफ तौर पर सामने आई है, जिसे गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है.आयकर विभाग ने यह जांच पिछले चार वर्षों के दौरान हुए ट्रांजैक्शन के आधार पर की है. यह अवधि वित्तीय वर्ष 2021-22 से लेकर वर्तमान समय तक की है. जांच आयकर अधिनियम की धारा 133A के तहत की गई, जिसके अंतर्गत विभाग को सर्वे और दस्तावेजों की जांच का अधिकार होता है. इस दौरान विभागीय टीम ने बैंक रिकॉर्ड, खातों और रिपोर्टिंग सिस्टम की गहन जांच की.

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