पिथौरागढ़: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100वर्ष पूर्ण होने पर भारत तिब्बत सीमा पर भारत के प्रथम गांव मिलम में संघ शताब्दी वर्ष मनाया गया. इस मौके पर विजयादशमी पर पथ संचलन का आयोजन किया गया. जोहार घाटी में डीडीहाट जिले के मुनस्यारी खण्ड में स्थित लीलम मण्डल के मिलम गांव में कठिन यात्रा मार्ग से पहुंचकर संघ के स्वयंसेवकों ने पथ संचलन निकाला.
कार्यक्रम में मिलम के ग्राम प्रधान कार्यक्रम के अध्यक्ष के नाते उपस्थित रहे. इसे संघ कार्य विस्तार की दृष्टि से प्रगतिशील कदम माना जा सकता है. भारत को विश्व गुरु बनाने से लेकर अखण्ड भारत का संकल्प लिए स्वयंसेवकों के उत्साह का प्रकटीकरण मिलम गांव में स्वयंसेवकों ने किया गया. सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण एवं जल संरक्षण, स्व का बोध, परिवार प्रबोधन पंच परिवर्तन के विषय को वक्ताओं ने स्पष्ट किया
कार्यक्रम में विभाग शारीरिक प्रमुख नवीन चन्द्र शर्मा, जिला संघचालक गोविन्द सिंह खाती,जिला प्रचारक गणेश, जिला सम्पर्क प्रमुख रणजीत सिंह खण्ड कार्यवाह प्रेम सिंह, प्रताप सिंह, दीवान सिंह भण्डारी, हर्षित डसीला,, गोकर्ण सिंह मर्तोलिया, गोकर्ण सुयाल,खुशाल सिंह धर्मशत्तू,दर्पण कुमार , सोनू निखुर्पा, विनोद सिंह उपस्थित रहे.
उधर भारत के प्रथम गांव चीन तिब्बत सीमा से लगे ग्राम गुंजी में संघ शताब्दी वर्ष पर शस्त्र पूजन और पथ संचलन का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ. अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख राजकुमार मटेला सहित अन्य अधिकारियों स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे. पहली बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों को अपने बीच इस प्रकार के कार्यक्रम से उत्साहित दिखे.
गुंजी (Gunji) गांव की समुद्र तल से ऊंचाई लगभग 3,200 मीटर (10,500 फीट) है. यह गांव उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले में, भारत–नेपाल–तिब्बत (चीन) की त्रि-सीमा के पास स्थित है. गुंजी कैलाश मानसरोवर और आदि कैलाश यात्रा के लिए एक प्रमुख पड़ाव (स्टॉप) है.
- संघ की 100 वर्ष की यात्रा का स्मरण:यह वर्ष संघ के एक सदी पूर्ण होने का प्रतीक है. यानी 1925 से 2025 तक संगठन ने समाज, राष्ट्र और संस्कृति के क्षेत्र में जो कार्य किए, उनका मूल्यांकन और उत्सव इस वर्ष में किया जा रहा है.
- संघ के कार्यों और योगदान का सम्मान:शिक्षा, सेवा, सामाजिक समरसता, पर्यावरण, ग्राम विकास, राष्ट्रभक्ति, और चरित्र-निर्माण जैसे अनेक क्षेत्रों में संघ ने कार्य किए हैं. शताब्दी वर्ष इन उपलब्धियों को समाज के सामने प्रस्तुत करने का अवसर है.
- नए शताब्दी के लिए संकल्प:संघ इस वर्ष को केवल उत्सव नहीं बल्कि “संकल्प वर्ष” मानता है. ताकि अगले 100 वर्षों के लिए संगठनात्मक, सामाजिक और सांस्कृतिक लक्ष्यों का निर्धारण किया जा सके.
- स्वयंसेवकों में प्रेरणा और एकता का भाव जगाना:देशभर में लाखों स्वयंसेवक इस अवसर पर पुनः संगठन के मूल उद्देश्यों — “राष्ट्र का पुनर्निर्माण” और “सर्वांगीण समाज सेवा” — के लिए समर्पण का नवीनीकरण करेंगे.
- समाज में व्यापक संपर्क और संवाद:इस अवसर पर पूरे भारत में घर-घर संपर्क, हिंदू सम्मेलन, समरसता बैठकें और सेवा कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि संघ के विचार और उद्देश्य समाज के सभी वर्गों तक पहुंचें.