देहरादून: उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के चलते हर साल खासकर मानसून सीजन में आपदा जैसे हालात बनते रहे हैं. इन प्राकृतिक आपदाओं की वजह से जान माल का काफी नुकसान होता है. ऐसे में उत्तराखंड सरकार प्राकृतिक आपदाओं के असल वजहों को जानने के लिए अध्ययन पर जोर दे रही है. साथ ही इस बात पर भी फोकस किया जा रहा है कि राहत बचाव कार्यों को बेहतर ढंग से करते हुए मानवीय नुकसान को कम किया जा सके. इसी क्रम में आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से राहत बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एसडीआरएफ और फायर डिपार्टमेंट को मजबूत करने की कवायद में जुट गई है.
रेस्क्यू टीमों को किया जाएगा मजबूत: दरअसल, हिमालय क्षेत्र में होने वाली प्राकृतिक घटनाओं को रोक नहीं जा सकता लेकिन उससे होने वाले इंपैक्ट या नुकसान को कम जरूर किया जा सकता है. यही वजह है कि अब उत्तराखंड सरकार भी इस दिशा में तेजी से काम करने का निर्णय लिया है. जिसके तहत राज्य सरकार प्राकृतिक आपदाओं के आने की असल वजहों का अध्ययन कर रही है, ताकि भविष्य में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से पहले कोई संकेत मिल सके साथ ही राहत बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एसडीआरएफ और फायर डिपार्टमेंट को इतना मजबूत किया जाए, ताकि किसी भी आपदा के दौरान यह टीम में बेहतर ढंग से राहत बचाव कार्यों को अंजाम दे सके.
खरीदे जाएंगे आधुनिक इक्विपमेंट्स: इसके लिए आपदा प्रबंधन विभाग, विश्व बैंक की यू प्रिपेयर परियोजना के जरिए एसडीआरएफ और फायर डिपार्टमेंट के लिए आधुनिक उपकरणों को खरीदने पर जोर दे रही है. जिसकी प्रक्रिया भी आपदा प्रबंधन विभाग ने शुरू कर दी है. राहत बचाव कार्यों में 35 से 40 उपकरणों की जरूरत होती है, जिसमें वाहन भी शामिल हैं. ऐसे में आपदा प्रबंधन विभाग एसडीआरएफ और फायर डिपार्टमेंट की डिमांड के अनुसार आधुनिक इक्विपमेंट्स खरीदने की प्रक्रिया शुरू की है. ताकि आने वाले समय में आपदा के दौरान एसडीआरएफ और फायर डिपार्टमेंट बेहतर ढंग से राहत बचाव कार्यों को कर सके.
एसडीआरएफ और फायर डिपार्टमेंट की ओर से तमाम इक्विपमेंट खरीदने की डिमांड की गई थी, उनको खरीदने के लिए विश्व बैंक की परियोजना “यू प्रिपेयर” के तहत कार्रवाई की जा रही है. इस परियोजना के तहत करीब 27 करोड़ रुपए की इक्विपमेंट्स एसडीआरएफ को दिया जा रहा है. इसके साथ ही फायर डिपार्टमेंट के लिए करीब 100 करोड़ रुपए की धनराशि खर्च की जाएगी, जिसमें इक्विपमेंट्स खरीदने, एक फायर ट्रेनिंग सेंटर बनाने और जिस फायर स्टेशन की स्थिति ठीक नहीं है, उसको ठीक करने का खर्च भी शामिल है. फिलहाल एसडीआरएफ और फायर डिपार्टमेंट के लिए जो इक्विपमेंट्स खरीदे जाने हैं. सभी इक्विपमेंट के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं. साथ ही कुछ इक्विपमेंट्स के वर्क आर्डर भी जारी किए जा चुके हैं.
विनोद कुमार सुमन, सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग
आपदा प्रबंधन विभाग ने की तैयारी: विनोद कुमार सुमन ने आगे कहा कि एसडीआरएफ और फायर डिपार्टमेंट को जो इक्विपमेंट उपलब्ध कराए जाने हैं वो सभी इक्विपमेंट एनडीएमए और एनडीआरफ की गाइडलाइन के अनुसार ही उपलब्ध कराए जाने हैं. ऐसे में विभाग की सहमति के बाद इक्विपमेंट्स खरीद को फाइनल किया जाता है और फिर टेंडर जारी कर इक्विपमेंट्स खरीदे जाते हैं. साथ ही कहा कि आपदा से निपटने के लिए जितने भी तरह के अत्याधुनिक उपकरणों की जरूरत होती है, वह सभी उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं. आपदा से निपटने के लिए 35 से 40 तरह के चीजों की जरूरत होती है, ऐसे में डिमांड के अनुसार इक्विपमेंट्स उपलब्ध कराए जाते हैं.
रिस्पांस टाइम घटाने पर जोर: एसडीआरएफ और फायर डिपार्टमेंट के साथ ही आपदा प्रबंधन विभाग को भी मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है. जिसके तहत आपदा प्रबंधन विभाग में एक्सपर्ट्स की कमी को दूर करने के लिए एक्सपर्ट्स की भर्ती की जा रही है. इसके साथ ही आपदा प्रबंधन विभाग की कैपेसिटी बिल्डिंग के मद में लोगों को ट्रेनिंग भी कराया जा रहा है. इसके साथ ही आम जनता को जागरूक करने के लिए आपदा मित्र और आपदा सखी जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं. साथ ही कहा कि पहले के मुकाबले वर्तमान समय में रिस्पांस टाइम काफी अधिक बेहतर हो गया है, क्योंकि पहले रिस्पांस टाइम लगभग एवरेज 30 मिनट का रहता था, जो अब घटकर एवरेज 11 से 12 मिनट हो गया है. जिसे एवरेज 5 मिनट करने पर काम किया जा रहा है.