चंपावत: जिले का खूबसूरत लोहाघाट क्षेत्र जहां देवदार के जंगलों से आच्छादित है, वहां बीते कई वर्षों में नगर में लगातार बढ़ते कंक्रीट के जंगल, अतिक्रमण, अवैध कटान से इन वृक्षों को संकट पैदा हो गया है. नगरी क्षेत्र में देवदार के वृक्षों के सूखने की तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद अब जिला प्रशासन एवं वन महकमा सख्त हो गया है. जिलाधिकारी मनीष कुमार के निर्देश पर लोहाघाट वन महकमा जहां देवदार के सूखने पेड़ों के ट्रीटमेंट की कार्रवाई की है. वहीं पेड़ों को सुखाने वाले अज्ञात लोगों के खिलाफ भी वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है. फिलहाल देवदार के वृक्षों पर मंडरा रहे संकट पर स्थानीय लोग भी चिंता व्यक्त कर रहे हैं.
चंपावत जनपद के लोहाघाट नगर पालिका क्षेत्र में देवदार के दुर्लभ और ऐतिहासिक वृक्षों पर संकट गहराता नजर आ रहा है. नगर क्षेत्र में अतिक्रमण की नीयत से रसायन डालकर सैकड़ों देवदार पेड़ों को सुखाने की साजिश सामने आने के बाद प्रशासन और वन विभाग सख्त हो गया है. मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन के संज्ञान में आया. इसके बाद वन विभाग भी हरकत में आया और तत्काल देवदार के सूखते पेड़ों को बचाने हेतु उपचारात्मक कार्रवाई शुरू की गई. उप प्रभागीय वन अधिकारी लोहाघाट सुनील कुमार के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने करीब एक दर्जन से अधिक देवदार के हरे पेड़ों में गार्डनिंग एवं विशेष ट्रीटमेंट किया है, ताकि उन्हें सुखने से बचाया जा सके.
साथ ही वन संरक्षण अधिनियम के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. हालांकि, लोहाघाट नगर क्षेत्र में देवदारों की सुरक्षा को लेकर वर्षों से एक बड़ी प्रशासनिक उलझन बनी हुई है. अधिकांश भूमि नजूल श्रेणी की है, जिसकी देखरेख राजस्व विभाग करता रहा है, जबकि पेड़ों की सुरक्षा का दायित्व नगर पालिका अथवा वन विभाग के बीच स्पष्ट रूप से तय नहीं हो पाया. जिलाधिकारी द्वारा जनवरी-फरवरी में एरिया वाइज विभागीय जिम्मेदारी तय करने की बात कही गई है, लेकिन जमीनी हकीकत में यह व्यवस्था व्यावहारिक रूप से कठिन मानी जा रही है. वहीं जिले लोहाघाट के सीनियर सिटीजन एवं वरिष्ट पत्रकार गणेश पांडे के अनुसार बीते कई दशकों में नगर क्षेत्र से अतिक्रमण या अन्य वजहों से अब तक 12 हजार से अधिक देवदार के पेड़ गायब हो चुके हैं.
वर्ष 1985 में, जब चंपावत पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा था, तब तत्कालीन पर्यावरण प्रेमी जिलाधिकारी विजेंद्र पाल ने लोहाघाट नगर के प्रत्येक देवदार पेड़ की नंबरिंग कर विस्तृत रिकॉर्ड तैयार कराया था, जिसमें लगभग 15 हजार पेड़ दर्ज थे. वर्ष 2013 में तत्कालीन जिलाधिकारी चौधरी द्वारा कराई गई गिनती में यह संख्या घटकर करीब 12 हजार रह गई. इसके बाद अवैध कटान और अतिक्रमण लगातार जारी रहा. स्थिति यहां तक पहुंच गई कि दिनदहाड़े देवदारों पर कुल्हाड़ी चलने लगी. वन विभाग ने जुर्माना तो लगाया, लेकिन यह हिम्मत कैसे और किसके संरक्षण में पैदा हुई, इस पर न तो गहन जांच हुई और न ही कोई स्थायी समाधान निकाला गया.
गणेश पांडे पांडे ने देवदार आच्छादित क्षेत्र में इन दुर्लभ प्रजाति के वृक्षों के संरक्षण हेतु सीसीटीवी कैमरे लगाने एवं उनका नियंत्रण सीधे थाने से किया जाने की बात कही है. वहीं नगरीय क्षेत्र में देवदार वन क्षेत्र की पूर्ण सुरक्षा वन विभाग को ही सौंपी जाए, जबकि नगर पालिका और वन विभाग की संयुक्त गश्त नियमित की जाए. साथ ही, वन क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों को लिखित रूप से पेड़ों की सुरक्षा की जिम्मेदारी देकर उन्हें सहभागी बनाया जाए, ताकि वे इन्हें अपनी धरोहर समझकर बचा सकें. वहीं दिल्ली, कोलकाता, मुंबई जैसे महानगरों से मायावती आश्रम और रीठा साहिब धार्मिक क्षेत्रों में आने वाले पर्यटक और तीर्थयात्री इन देवदारों के पेड़ों का दीदार करते हैं.