गणेश जी की मूर्ति दूर कर सकती है बड़े-से-बड़ा वास्तु दोष, जानिए कैसे?

वास्तु शास्त्र में माना गया है कि घर और कार्यक्षेत्र में वास्तु नियमों का ध्यान रखने से व्यक्ति को इसके अच्छे परिणाम ही प्राप्त होते हैं। आपके कई लोगों को अपने ऑफिस डेस्क या फिर अपनी कार में गणेश जी रखते देखा होगा। वास्तु की दृष्टि से ऐसा करना बहुत ही शुभ माना जाता है। तो चलिए जानते हैं गणेश जी की मूर्ति स्थापित करने के कुछ वास्तु नियम।

मिलते हैं ये लाभ

अगर आप वास्तु के नियमों के अनुसार, अपने घर या कार्यक्षेत्र आदि में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करते हैं, तो इससे वास्तु दोष से मुक्ति पाई जा सकती है। इसके साथ ही घर और कार्यक्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। इसका अच्छा प्रभाव परिवार के सदस्यों पर भी देखने को मिलता है और गणेश जी की कृपा से तरक्की के योग बनने लगते हैं। वास्तु शास्त्र में यह माना गया है कि भगवान गणेश की पूजा से रचना संबंधी वास्तु दोष दूर हो सकते हैं।

कैसा होना चाहिए मूर्ति का रंग

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में गणेश जी की सफेद रंग की मूर्ति स्थापित करना बहुत ही शुभ माना गया है। इसी के साथ आप सिंदूरी रंग की गणपति जी की मूर्ति भी घर में स्थापित कर सकते हैं। अगर आप बच्चों के स्टडी रूप में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करना चाहते हैं, तो इसके लिए पीले या हल्के हरे रंग की मूर्ति सबसे बेहतर मानी जाती है। आप इसे बच्चों के स्टडी टेबल पर स्थापित कर सकते हैं, इससे शिक्षा क्षेत्र में सफलता की संभावना बढ़ जाती है।

घर में कहां लगाएं गणेश जी की मूर्ति

पूजा-पाठ के लिए घर के उत्तर-पूर्वी कोने में गणपति जी की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। वहीं घर के मुख्य द्वार पर भी गणेश जी की मूर्ति लगाना उत्तम माना जाता है, क्योंकि यह घर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान होता है। यहीं से सकारात्मक ऊर्जा घर के अंदर प्रवेश करती है। ऐसे में यदि आपका मुख्य द्वार उत्तर या दक्षिण दिशा में है, तो गणेश जी की मूर्ति लगाना शुभ माना जाता है। मूर्ति इस प्रकार लगाएं की गणेश जी का मुख अंदर की ओर हो। मुख्य द्वार पर सिंदूरी रंग की मूर्ति लगाना बहुत ही शुभ होता है।

ऑफिस में लगाएं ऐसी मूर्ति

वास्तु शास्त्र के अनुसार, ऑफिस डेस्क पर भी भगवान श्री गणेश की मूर्ति लगाना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऑफिस डेस्क पर गणेश जी की सफेद रंग की मूर्ति लगानी चाहिए। कार्यक्षेत्र में बप्पा जी की खड़ी हुई प्रतिमा लगाना अधिक शुभ माना जाता है। बस इस बात का ध्यान रखें कि गणेश जी का मुख दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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