उत्तराखंड सचिवालय सेक्शन्स सिस्टम में होंगे बड़े बदलाव, सीएस ने लिया बड़ा फैसला, पढ़िये

देहरादून: उत्तराखंड सचिवालय में अनुभागों के काम और यहां की व्यवस्था हमेशा सुर्खियों में रहती है. ऐसा इसलिए भी क्योंकि सचिवालय की सबसे अहम कड़ी यही अनुभाग हैं, जहां से लिखा-पढ़त यानी फाइलिंग के काम को निपटाया जाता है. शायद यही कारण है कि मुख्यसचिव ने अनुभागों को लेकर दिशा निर्देश जारी किए हैं. जिससे यहां की व्यवस्था को व्यवस्थित किया जा सके.

राज्य में सचिवालय मैनुअल के तहत अनुभागों के निरीक्षण की व्यवस्था बनाई गई हैं, लेकिन स्थिति ये है कि अनुभागों में निरीक्षण को लेकर कोई खास प्रयास नहीं दिखाई देते. ऐसे में अब मुख्य सचिव ने इस संदर्भ में आदेश जारी करते हुए तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों को सचिवालय के इस नियम की याद दिलाई है. अब सरकार ने इस व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं.

नियमों के मुताबिक मुख्य सचिव किसी भी अनुभाग का निरीक्षण साल में एक बार एक माह की पूर्व सूचना देकर कर सकते हैं. विभागीय प्रमुख सचिव या सचिव अपने विभाग के 25 प्रतिशत और अपर सचिव 30 प्रतिशत अनुभागों का हर साल निरीक्षण करेंगे. प्रमुख सचिव और सचिव हर साल अगस्त महीने में एक निरीक्षण कैलेंडर तैयार कर उसे मुख्य सचिव और सचिवालय प्रशासन विभाग को भेजेंगे. इसमें स्पष्ट अंकित होगा कि किस अनुभाग का निरीक्षण किस तिथि को किया जाएगा.

नियम यह भी कहते हैं कि अपर सचिव अपने नियंत्रणाधीन अनुभागों का निरीक्षण हर छह महीने में करेंगे, जबकि संयुक्त सचिव, उप सचिव और अनु सचिव तीन महीने में एक बार निरीक्षण करेंगे. अनुभाग अधिकारी अपने अनुभाग का निरीक्षण हर महीने करेंगे. इसके अलावा आकस्मिक निरीक्षण की व्यवस्था भी है.

निरीक्षण के दौरान फाइलों का रखरखाव, रिकार्डिंग, वीडिंग, सफाई और बैठने की व्यवस्था की स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी. निरीक्षण रिपोर्ट पर तत्काल कार्यवाही की जानी होगी. अनुपालन आख्या 15 दिन के भीतर प्रमुख सचिव और सचिव को प्रस्तुत की जाएगी. निरीक्षणकर्ता अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि वे अनुपालन की प्रगति या उसमें आ रही कठिनाइयों से समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारियों को बताएं.

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